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    मोर गांव, मोर पानी’ महाभियान का असर: बेमेतरा जिले के तीन विकासखंड क्रिटिकल से सेमी-क्रिटिकल जोन में पहुंचे

    News DeskBy News DeskSeptember 4, 2026No Comments4 Mins Read
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    मोर गांव, मोर पानी’ महाभियान का असर: बेमेतरा जिले के तीन विकासखंड क्रिटिकल से सेमी-क्रिटिकल जोन में पहुंचे
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    मोर गांव, मोर पानी’ महाभियान का असर: बेमेतरा जिले के तीन विकासखंड क्रिटिकल से सेमी-क्रिटिकल जोन में पहुंचे

    जल संरक्षण कार्यों से भू-जल स्तर में सुधार, मनरेगा एवं VB-G RAM G के तहत 33 हजार से अधिक कार्य संपादित

    बेमेतरा, 04 सितंबर 2026 ‘मोर गांव, मोर पानी’ महाभियान के तहत जिले में किए गए व्यापक जल संरक्षण कार्यों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। भू-जल की दृष्टि से क्रिटिकल श्रेणी में आने वाले बेमेतरा जिले के बेमेतरा, बेरला एवं नवागढ़ विकासखंड अब क्रिटिकल से सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में पहुंच गए हैं। यह उपलब्धि जल संरक्षण के लिए किए गए सतत प्रयासों, वैज्ञानिक प्लानिंग, जनभागीदारी तथा मनरेगा एवं VB-G RAM G के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है।

    कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं के कुशल मार्गदर्शन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुश्री प्रेमलता पदमाकर के नेतृत्व में जिले में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। कुछ वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ के 146 विकासखंडों में से केवल 5 विकासखंड क्रिटिकल श्रेणी में थे, जिनमें 3 विकासखंड बेमेतरा जिले के बेमेतरा, बेरला एवं नवागढ़ शामिल थे। वहीं साजा विकासखंड सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में था। भू-जल स्तर में गिरावट के कारण ग्रीष्म ऋतु में जल स्रोतों के सूखने तथा पेयजल, सिंचाई एवं निस्तार के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

    33 हजार से अधिक जल संरक्षण कार्यों का हुआ क्रियान्वयन

    जल संकट की स्थिति को देखते हुए जिले में मनरेगा एवं VB-G RAM G के तहत जल संरक्षण से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत कर संपादित कराया गया। विगत वर्षों में ट्रेंच निर्माण, तालाब गहरीकरण, नवीन तालाब निर्माण, फार्म पॉन्ड, रिचार्ज पिट, अंडरग्राउंड डाइक, चेकडैम, रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग सहित विभिन्न जल संरक्षण कार्यों के लगभग 33,438 कार्य कराए गए।

    इसके साथ ही जनसहयोग एवं जनभागीदारी के माध्यम से भी जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया गया। ट्रेंच निर्माण, सोकपिट तथा नालों में बारी बंधान जैसे लगभग 46,762 कार्य जनभागीदारी से कराए गए। इन प्रयासों से वर्षा जल के संरक्षण एवं भू-जल रिचार्ज को बढ़ावा मिला, जिसका सकारात्मक प्रभाव भू-जल स्तर पर दिखाई दे रहा है।

    लेबर बजट से वाटर बजट की ओर बढ़ा जिला

    जल संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने में वैज्ञानिक एवं सहभागी दृष्टिकोण अपनाया गया। सभी ग्राम पंचायतों में जल बजट तैयार कराने के लिए NGO प्रदान संस्था के सहयोग से ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया गया तथा जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।

    जल बजट के माध्यम से यह चिन्हित किया गया कि कहां पानी गिरता है, कहां बह जाता है और कहां उसे रोका जा सकता है। इसके आधार पर GIS आधारित प्लान तैयार कर स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप जल संरक्षण कार्यों का चयन, स्वीकृति एवं क्रियान्वयन किया गया। इस प्रक्रिया में टॉप-डाउन के बजाय बॉटम-अप अप्रोच को अपनाया गया, जिससे ग्राम स्तर पर लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हुई।

    फसल चक्र परिवर्तन से भू-जल संरक्षण को मिला बढ़ावा

    जिले में जल संरक्षण के साथ-साथ भू-जल के अत्यधिक दोहन को रोकने के लिए फसल चक्र परिवर्तन पर भी विशेष जोर दिया गया। रबी सीजन में अधिक पानी की आवश्यकता वाली धान की फसल को हतोत्साहित कर कम पानी में होने वाली अन्य फसलों को प्राथमिकता देने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया गया।

    जिले की ग्राम पंचायतों में रबी सीजन में धान की फसल नहीं लेने के संबंध में ग्राम सभाओं में संकल्प एवं प्रस्ताव पारित कराए गए। रबी में धान का रकबा कम होने से भू-जल के अत्यधिक दोहन में कमी आई और भू-जल स्तर पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला।

    जनभागीदारी से जल संरक्षण बना जनआंदोलन

    जल संरक्षण को लेकर जिले में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। सामूहिक रैलियों, जल संचय शपथ, वॉल राइटिंग सहित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।

    घरों में वर्षा जल के संरक्षण एवं भू-जल रिचार्ज के लिए लोगों को सोकपिट निर्माण हेतु प्रेरित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप जिले में 37,821 सोकपिट बनाए गए। इस अभियान में बिहान की दीदियों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    कलेक्टर ने कहा—क्रिटिकल से सेमी-क्रिटिकल आना मंजिल नहीं, एक पड़ाव है

    कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं ने कहा कि, “क्रिटिकल से सेमी-क्रिटिकल आना मंजिल नहीं, बल्कि एक पड़ाव है। हमारा अंतिम लक्ष्य बेमेतरा जिले को सेफ जोन में लाना है। मनरेगा एवं VB-G RAM G ने यह साबित किया है कि यह केवल रोजगार उपलब्ध कराने की योजना नहीं, बल्कि गांव के भविष्य और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।”

    उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के लिए प्रशासन, ग्राम पंचायतों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के सामूहिक प्रयासों को आगे भी निरंतर जारी रखा जाएगा, ताकि जिले में भू-जल स्तर को स्थायी रूप से बेहतर बनाया जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित हो।

    News Desk

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