Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    News Hint24
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
      • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    News Hint24
    Home»देश»सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम चुनाव और निर्वाचन आयोग को नियंत्रित नहीं कर सकते…
    देश

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम चुनाव और निर्वाचन आयोग को नियंत्रित नहीं कर सकते…

    By April 25, 2024No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम चुनाव और निर्वाचन आयोग को नियंत्रित नहीं कर सकते…
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में दर्ज 100 फीसदी मतदान को वीवीपैट पर्चियों से मिलान करने की मांग पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह चुनाव को नियंत्रित नहीं कर सकता।

    शीर्ष अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और हम इसे नियंत्रित नहीं कर सकते।

    जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की पीठ ने यह टिप्पणी ईवीएम में दर्ज 100 फीसदी मतों को वीवीपैट पर्चियों से मिलान करने की मांग वाली याचिकाओं पर निर्वाचन आयोग से कुछ तथ्यात्मक स्पष्टीकरण लेने के बाद दोबारा से फैसला सुरक्षित करते हुए यह टिप्पणी की है। 

    जस्टिस दत्ता ने यह टिप्पणी याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण की दलीलों को सुनने के बाद की।

    सुनवाई के दौरान अधिवक्ता भूषण ने पीठ से कहा कि भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा ये कहना कि ईवीएम में प्रोसेसर चिप सिर्फ एक प्रोग्रामेबल है, यह संदेह के घेरे में है।

    उनके इस दलील पर जस्टिस खन्ना ने कहा कि नर्वाचन आयोग के अधिकारी ने इस संदेह को दूर कर दिया है, अब इसमें कुछ बचा नहीं है। 

    इसके जवाब में अधिवक्ता भूषण ने पीठ से कहा कि ईवीएम बनाने वाली कंपनी ने सचूना के अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत दिए अपने जवाब में स्वीकार किया है कि इस चिप का दोबारा से उपयोग किया गया है। उन्होंने कहा कि हमने निर्माता कंपनी के वेबसाइट से माइक्रोकंट्रोलर की विशेषताएं डाउनलोड कीं है। 

    इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि अभी तक ऐसी किसी घटना की रिपोर्ट सामने नहीं है, हम चुनाव को नियंत्रित नहीं कर सकते। उन्होंने भूषण से कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक प्राधिकरण है और किसी अन्य संवैधानिक संस्था को नियंत्रित नहीं कर सकते।

    जस्टिस खन्ना ने भी कहा कि निर्वाचन आयोग के अधिकारी ने साफ किया है कि वे कोई प्रोग्राम लोड नहीं कर रहे हैं। वे सिर्फ चुनाव चिन्ह अपलोड कर रहे हैं, जो एक छवि फाइल है।

    अधिवक्ता ने कहा कि यदि कोई दुर्भावनापूर्ण प्रोग्राम प्रतीक के साथ लोड किया गया है तो? उन्होंने कहा कि आयोग का यह कहना है कि फ्लैश मेमोरी रिप्रोग्रामेबल नहीं है, पूरी तरह से गलत है। इस पर जस्टिस खन्ना ने कहा कि हम इसका ध्यान रखेंगे, हमने तर्क को समझ लिया है। 

    उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग का कहना है कि फ्लैश मेमोरी में कोई प्रोग्राम नहीं है और सिर्फ चुनाव चिन्ह हैं। वे सॉफ्टवेयर नहीं बल्कि प्रतीकों का भंडारण कर रहे हैं।

    जहां तक कंट्रोल यूनिट (सीयू) में माइक्रोकंट्रोलर का सवाल है, यह अज्ञेयवादी (एगनॉस्टिक) है, यह पार्टी के नाम या उम्मीदवार के नाम को नहीं पहचानता है। यह मतपत्र इकाई के बटनों को पहचानता है। ईवीएम बनाने वाली कंपनी को यह नहीं पता कि किस पार्टी को कौन सा बटन आवंटित किया जाएगा।

    इसके बाद अधिवक्ता भूषण ने कहा कि वे (निर्वाचन आयोग) मानते हैं कि सिग्नल बैलेट यूनिट से वीवीपैट और वीवीपैट से कंट्रोल यूनिट तक प्रवाहित होता है।

    यदि वीवीपैट फ्लैश मेमोरी में कोई दुर्भावनापूर्ण प्रोग्राम है। इस पर जस्टिस खन्ना ने कह कि इसलिए हमने उनसे पूछा और उन्होंने कहा कि चिप सिर्फ एक बार ही प्रोग्राम किया जा सकता है।

    4 बिंदुओं पर स्पष्टीकरण
    सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित किए जाने के छह दिन बाद दोबारा से बुधवार को सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने कहा कि हम सिर्फ 3-4 बिंदुओं पर स्पष्टीकरण चाहते हैं।

    कुछ चीजें तथ्यात्मक रूप से हमें सही करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इन सवालों का जवाब देने के लिए निर्वाचन आयोग के संबंधित अधिकारी को भोजनावकाश के बाद 2 बजे सुनवाई के दौरान मौजूद रहने का आदेश दिया ताकि इन सवालों का जवाब मिल सके।

    – पहला यह कि ‌माइक्रोकंट्रोलर नियंत्रण इकाई में लगा है या वीवीपैट में? ऐसा संकेत मिल रहा है कि हम इस धारणा में थे कि माइक्रोकंट्रोलर ईवीएम के नियंत्रण इकाई में लगा है। हमें बताया गया कि वीवीपैट में फ्लैश मेमोरी होती है।
    – दूसरा, क्या सिर्फ नियंत्रण ईकाई को सील किया जाता है या वीवीपैट को अलग से रखा जाता है, इस पर हम कुछ स्पष्टीकरण चाहते हैं।
    – तीसरा,चुनाव चिन्ह लोडिंग यूनिट्स का संदर्भ लेते हैं, उनमें से कितनी उपलब्ध हैं?
    – चौथा, चुनाव याचिका की सीमा 30 दिन है और इसलिए ईवीएम में डेटा 45 दिनों के लिए संग्रहीत किया जाता है। लेकिन जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत इसे सुरक्षित रखने की सीमा 45 दिन है, इसकी अवधि तदनुसार बढ़ानी पड़ सकती है।

    दो बजे सुनवाई शुरू हुई, निर्वाचन आयोग के अधिकारी ने जवाब देना शुरू किया
    निर्वाचन आयोग की ओर से पेश अधिकारी ने पीठ को बताया कि ईवीएम के सभी तीन इकाइयों यानी नियंत्रण इकाई, मतपत्र इकाई और वीवीपैट के पास अपने स्वयं के माइक्रोकंट्रोलर हैं।

    ये माइक्रोकंट्रोलर इसमें रखे गए हैं। उन तक भौतिक रूप से कोई नहीं पहुंच सकता है। सभी माइक्रोकंट्रोलर चिप सिर्फ एक बार प्रोग्राम करने योग्य हैं। उन्हें बदला या दोबरा से प्रोग्राम नहीं किया जा सकता। 

    शीर्ष अदालत को आयोग के अधिकारी ने बताया कि मतदान के बाद ईवीएम के तीनों ईकाई यानी नियंत्रण इकाई, मतपत्र इकाई और वीवीपैट को सील कर दिया जाता है। आयोग ने पीठ को यह भी बताया कि सभी ईवीएम मशीन का डेटा 45 दिनों के लिए सरंक्षित किया जाता है।

    46वें दिन, संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी संबंधित उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखकर यह पता लगाने के लिए आग्रह करते हैं कि क्या कोई चुनाव याचिका दायर की गई है। यदि कोई चुनाव याचिका दायर की जाती है, तो मशीनें अदालत के आदेश आने तक संरक्षित रखी रहती है।

    ईवीएम के सोर्स कोड का नहीं किया जा सकता खुलासा
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईवीएम के सोर्स कोड का खुलाना नहीं किया जा सकता है। यदि सोर्स कोड का खुलासा किया गया तो इसका दुरुपयोग होगा।

    इसका कभी की खुलासा नहीं किया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष पॉल ने कहा कि ईवीएम के लिए एक सोर्स कोड है, जिसका खुलासा नहीं किया गया है।

    सुधार करना है तो हम कर सकते हैं : जस्टिस खन्ना
    मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस खन्ना ने कहा कि यदि कुछ सुधार करने की जरूरत है तो हम जरूर सुधार कर सकते हैं। अदालत ने पहले भी दो बार मामले में हस्तक्षेप किया है।

    उन्होंने कहा कि पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वीवीपैट अनिवार्य होना चाहिए‌ और दूसरी बार जब अदालत ने वीवीपैट पर्चियों के मिलान एक से बढ़ाकर पांच कर दी थी।‌ 

    जस्टिस दत्ता ने कहा कि जब हम पूछते हैं कि कौन से सुधार किए जा सकते हैं, तो पहला अनुरोध मतपत्रों पर वापस जाने का था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह कोई दोबारा सुनवाई नहीं है, अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों को पढ़ने के बाद, हमारे पास कुछ प्रश्न थे, मेरे भाई जस्टिस के पास कुछ प्रश्न थे, इसलिए हमने उन्हें आयोग से पूछ लिया। पीठ ने कहा कि अगर कोई कुछ गलत करता है तो उसके लिए कानून में परिणाम दिए गए हैं। 

    पीठ ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने खुद कहा है कि उन्हें आशंका है, उन्हें खुद भी यकीन नहीं है। पीठ ने यह भीर कहा कि क्या हम संदेह के आधार पर परमादेश जारी कर सकते हैं? इस पर अधिवक्ता संतोष पॉल ने पीठ से कहा कि इस देश में हेराफेरी करने के लिए सॉफ्टवेयर मौजूद हैं।

    Related Posts

    ओडिशा के कंधमाल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़, दो माओवादी मारे गए, मृतकों में रश्मि शामिल

    February 23, 2026

    शरद पवार परिवार में खुशखबरी: सुप्रिया सुले की बेटी रेवती की सारंग संग सगाई, नागपुर से जुड़ा रिश्ता

    February 11, 2026

    विध्वंस के 1000 साल बाद सोमनाथ में भव्य महाशिवरात्रि, 5 लाख श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

    February 11, 2026

    गौमूत्र पर विश्वास: नवजोत कौर सिद्धू का कहना – स्नान व सेवन से मिली ताकत, कैंसर से निबटने में मदद

    February 2, 2026

    1️जनवरी में यूपीआई ने बनाया नया रिकॉर्ड, 28.33 लाख करोड़ रुपये का हुआ लेन-देन

    February 2, 2026

    नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 24 घंटे उड़ानें शुरू

    February 2, 2026
    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    अन्य ख़बरें

    सुशासन तिहार में हितग्राहियों से आत्मीय संवाद: योजनाओं के लाभ से बदलती जिंदगी की तस्वीर देख मुख्यमंत्री हुए प्रसन्न….

    May 21, 2026

    ग्राम कुशहा की चौपाल में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुनी ग्रामीणों की समस्याएं, तेंदू, सतालू, चार और लीची का लिया स्वाद, पेयजल समस्याओं के त्वरित समाधान के दिए निर्दे…..

    May 21, 2026

    सुरक्षित छत्तीसगढ़ की ओर कदमः ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112’ के आधुनिक वाहनों को हरी झंडी, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने राजनांदगांव से वाहनों को किया रवाना….

    May 21, 2026

    ’उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दी विकास कार्यों की बड़ी सौगात, 4.36 करोड़ रूपए लागत के सड़क पुल-पुलिया निर्माण का किया भूमिपूजन’….

    May 21, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    संपादक - Mansoor Hasan
    मोबाइल - +91 9300847172
    ईमेल - [email protected]

    कार्यालय

    छत्तीसगढ़ - 40/504 , EVERGREEN CHOWK , BAIJANTAHAPARA , Raipur - CG

    मध्यप्रदेश - NOORMAHAL, PATHAR WALI GALI NO. 02, BHOPAL Dist.-BHOPAL
    May 2026
    M T W T F S S
     123
    45678910
    11121314151617
    18192021222324
    25262728293031
    « Apr    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.